अखिल भारतीय शिक्षा हुंकार रैली ने सरकार के खिलाफ भरी हुंकार! केवाईएस ने निभाई हिस्सेदारी!


  • देश में दोहरी शिक्षा-नीति को खत्म करने की मांग उठाई!  
  • हजारों की संख्या में छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों ने रैली में ली हिस्सेदारी!
  • केवाईएस ने सभी को केजी से पीजी तक अनिवार्य और समान शिक्षा देने की भी मांग उठाई!

नई दिल्ली, 18 फरवरी 2019: आज क्रांतिकारी युवा संगठन (केवाईएस) ने अखिल भारतीय शिक्षा अधिकार मंच (ए.आई.एफ़.आर.टी.ई.) एवं अन्य प्रगतिशील संगठनों के साथ मिलकर अखिल भारतीय शिक्षा हुंकार रैली का केंद्र एवं राज्य सरकारों की शिक्षा नीतियों  खिलाफ आयोजन किया| रैली में देश में व्याप्त असमान शिक्षा व्यवस्था, जिसके कारण  समाज में गैर-बराबरी पनपती है, उसको खत्म करने की मांग उठाई गयी| साथ ही, सभी के लिए केजी से परास्नातक तक सभी को बराबर शिक्षा, सरकारी स्कूल के छात्रों के लिए सरकारी शिक्षण संस्थानों में 10% रियायती अंक देने, और शिक्षा के निजीकरण पर रोक लगाने इत्यादि मांगों को भी उठाया गया| रैली संसद मार्ग से अंबेडकर भवन तक चली, जहां पर उसका समापन सांस्कृतिक कार्यक्रम और जन-संसद से हुआ|

       ज्ञात हो कि बीजेपी सरकार के शासन में उच्च-शिक्षा पर लगातार हमला बढ़ा है| यह हमला कभी छात्रों की फीस बढ़ाकर, तो कभी शिक्षा-बजट को घटाकर, तो कभी सीटों में कटौती करके किया जाता रहा है| सरकार द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में नई-नई नीतियां जैसे- शैक्षणिक संस्थानों को पूरा अनुदान न देना, कॉलेजों को ‘स्वायत्त’ बनाना, रैंकिंग के आधार पर बाँट कर अनुदान देना और हेफा से क़र्ज़ को अनिवार्य करना जिसके तहत भारी फीस बढ़ोत्तरी होगी, शिक्षकों को स्थायी नौकरियाँ न देकर उन्हें ठेके पर पढ़ाने को मजबूर करना, आदि लायीं जा रही हैं| सरकार की इन नीतियों से राजकीय और केन्द्रीय विश्वविद्यालयों के बीच मौजूदा गैर-बराबरी और अधिक बढ़ेगी और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में क्रमशः सीटों और नौकरियों की कटौती के कारण विश्वविद्यालयों तक पहुँच सिर्फ कुछ लोगों का विशेषाधिकार बनकर रह जाएगा|

       कार्यक्रम के दौरान समान स्कूली प्रणाली को स्थापित करने की बात को पुरजोर तरीके से रखा है| ज्ञात हो कि मौजूदा दौर में राज्य-सरकारों द्वारा चलाये जा रहे सरकारी स्कूलों में छात्रों को बहुत ही कठिनाई में पढने को मजबूर होना पड़ता है| यह स्कूल ज्यादातर बहुत ही लचर तरीके से चलाये जाते हैं, जहाँ पर शिक्षकों की संख्या भी पूरी नहीं होती है| साथ ही, इन स्कूलों में बुनियादी सुविधाएँ जैसे स्वच्छ शौचालय और साफ़ पानी भी मुहैया नहीं होता है| यह एक कड़वी सच्चाई है कि इन बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जो छात्र बारहवीं तक सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं,वो कड़ी मेहनत के बावजूद सरकारी विश्वविद्यालय में दाखिला हासिल नहीं कर पाते हैं| ज्ञात हो कि देश भर की राज्य सरकारें शिक्षा को खत्म करने के कदम उठा रही हैं| ज्ञात हो कि पिछले 4 सालों में दिल्ली के सरकारी स्कूलों की दसवीं व बारहवीं की नियमित कक्षाओं में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या में क्रमश: 43,540 व 53,431 की कमी आई है| हरियाणा में पिछले दो सालों में 1500 से ज्यादा प्राइमरी और मिडिल स्कूलों को बंद कर दिया गया है| कठिन परिस्थितियों में पढ़ने या पढ़ाई से निकाले जाने के कारण, सरकारी स्कूल के छात्रों के लिए सरकारी विश्वविद्यालयों में एड्मिशन एक दूर की कौड़ी है|

       कार्यक्रम के दौरान दोहरी-शिक्षा नीति और स्कूली शिक्षा के निजीकरण से पनपने वाली गैर-बराबरी पर भी चिंता व्यक्त की गयी| ज्ञात हो कि रेगुलर में दाखिला पाने वाले बहुसंख्यक छात्र प्राइवेट स्कूलों से और सुसम्पन्न परिवारों से आते हैं| जबकि समाज के निम्न तबके से आने वाले छात्र रेगुलर कोर्सों से बाहर हो जाते हैं और मजबूरी में कॉरेस्पोंडेंस या ओपन में एडमिशन ले लेते हैं| देश के विभिन्न कॉरेस्पोंडेंस विभागों में पढने वाले ज्यादातर छात्र एससी/एसटी/ओबीसी/अल्पसंख्यक समुदाय से आते हैं जो दोहरी शिक्षा की आग की जलन को- सरकारी स्कूल से लेकर दूरस्थ शिक्षा में घटिया स्तर की उच्च-शिक्षा तक – लगातार सहते हैं| यह एक शैक्षणिक नस्लभेद है जो निरंतर पुनरुत्पादित होता रहता है| 12वीं की परीक्षा पास करने वाले छात्रों की कुल संख्या( जो पहले ही काफी कम और निराशाजनक है) का केवल छोटा हिस्सा ही उच्च शिक्षा में किसी तरह पहुँच पाता है| जिससे यह दिखता है कि उच्च शिक्षा की चाह रखना, विशेषकर रेगुलर माध्यम से उच्च शिक्षा की चाह रखना बहुसंख्यक भारतीय युवाओं के लिए दूर का स्वप्न है|

       रैली का समापन जन-संसद के आयोजन के साथ हुआ, जहां पर देश-भर में किए गए समान शिक्षा पर जनमत-संग्रह का परिणाम घोषित किया गया| इस जनमत-संग्रह में देश में व्याप्त प्राइवेट स्कूल और सरकारी स्कूल की दोहरी शिक्षा नीति को खत्म करने की मांग उठाई गयी| साथ ही, केजी से परास्नातक तक सबको समान शिक्षा दिये जाने की भी मांग उठाई गयी| यह रैली सरकार को एक चेतावनी थी और आने वाले दिनों मे क्रांतिकारी युवा संगठन सभी के लिए समान और अनिवार्य शिक्षा को लेकर अपना आंदोलन और भी तेज़ करेगा|
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