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मानव संसाधन विकास मंत्रालय का हुआ घेराव! एसओएल छात्रों ने दिल्ली विश्वविद्यालय में हो रहे भेदभाव के खिलाफ किया प्रदर्शन!

डीयू प्रशासन द्वारा कक्षाएं की जा रही समाप्त, परन्तु कोर्स अभी भी अधूरा! छात्रों का परीक्षा में फेल होना तय!
देश-भर के पत्राचार शिक्षण संस्थानों की स्थिति को ठीक करने के लिए उच्च-स्तरीय कमेटी का गठन करने की मांग उठाई!

नई दिल्ली, 26 फरवरी 2019: क्रांतिकारी युवा संगठन (केवाईएस) कार्यकर्ताओं ने कल सैकड़ों की संख्या में दिल्ली विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ़ ओपन लर्निंग (एसओएल) छात्रो के साथ मिलकर अपने मुद्दों को लेकर मानव संसाधन विकास मंत्रालय का घेराव कियाछात्रों ने अपनी समस्याओं को लेकर निदेशक (केंद्रीय विश्वविद्यालय), श्री सुबोध कुमार घिल्डियाल को मानव संसाधन विकास मंत्री को संबोधित ज्ञापन भी सौंपा| ज्ञात हो कि छात्रों ने अपनी समस्याओं को लेकर कई बार एसओएल और डीयू प्रशासन को ज्ञापन सौंपा हैपरन्तु प्रशासन का रवैया छात्रों के प्रति असंवेदनशील ही रहा है|
          ज्ञात हो कि अगले हफ्ते बी.ए. प्रोग्राम के छात्रों की कक्षाएँ समाप्त कर दी जाने वाली हैंजबकि उनका कोर्स अभी भी पूरा नहीं हुआ है| छात्रों को जो स्टडी मटेरियल मिला हैवो भी बिलकुल खराब है और पूरा नहीं मिला हैसाथ हीशिक्षकों का छात्रों के प्रति कोई भी दायित्व नहीं है, जिसके कारण छात्रों को पूरा कोर्स पढाया जाना सुनिश्चित नहीं किया जा रहा है| कोर्स अधूरा होने और कक्षाएँ समाप्त किये जाने के कारण छात्रों के फेल होने का रास्ता तैयार किया जा रहा हैयह छात्र पहले ही समाज के वंचित वर्ग से आते हैं और उनके खिलाफ उदासीन रवैया प्रशासन की असंवेदनशीलता साफ़ दिखाता है| जब 50% से अधिक छात्र फ़ैल हो रहे है तथा लगभग 95% छात्र परीक्षा में अच्छा नहीं कर पा रहे है तो ये एसओएल की विफलता को दर्शाता है|
          एसओएल में परेशानी झेलने के अतिरिक्त छात्रों ने देश के अन्य पत्राचार छात्रों को होने वाली समस्याओं का भी मुद्दा उठाया| उन्होने दोहरी-शिक्षा नीति और स्कूली शिक्षा के निजीकरण से पनपने वाली गैर-बराबरी के खिलाफ नारे लगायेज्ञात हो कि रेगुलर में दाखिला पाने वाले बहुसंख्यक छात्र प्राइवेट स्कूलों से और सुसम्पन्न परिवारों से आते हैंजबकिसमाज के निम्न तबके से आने वाले छात्र रेगुलर कोर्सों से बाहर हो जाते हैं और मजबूरी में कॉरेस्पोंडेंस या ओपन में एडमिशन ले लेते हैंदेश के विभिन्न कॉरेस्पोंडेंस विभागों में पढने वाले ज्यादातर छात्र एससी/एसटी/ओबीसी/अल्पसंख्यक समुदाय से आते हैं जो दोहरी शिक्षा की आग की जलन को- सरकारी स्कूल से लेकर दूरस्थ शिक्षा में घटिया स्तर की उच्च-शिक्षा तक – लगातार सहते हैंयह एक शैक्षणिक नस्लभेद है जो निरंतर पुनरुत्पादित होता रहता हैअब केंद्र सरकार द्वारा शिक्षा पर हमले जैसे सार्वजनिक शिक्षा का निजीकरण और व्यवसायीकरण, उच्च शिक्षण संस्थानों को स्वायत्त बनाना, हेफा द्वारा कर्ज़ देना, आदि शामिल हैं, उनसे वंचित छात्रों का उच्च शिक्षा तक पहुँच पाना और बजी ज्यादा मुश्किल हो जाएगा| जिससे यह दिखता है कि उच्च शिक्षा की चाह रखनाविशेषकर रेगुलर माध्यम से उच्च शिक्षा की चाह रखना बहुसंख्यक भारतीय युवाओं के लिए दूर का स्वप्न है|
          एसओएल छात्रों ने मानव संसाधन विकास मंत्री को संबोधित और अपनी मांगों चिन्हित करते हुए एक ज्ञापन सौंपाज्ञापन में तुरंत अपनी कक्षाओं और स्टडी सेंटरों की संख्या बढ़ाने,आल-रूट बस पास और लाइब्रेरी सुविधा देनेसमय पर रिजल्ट घोषित करने और महिला छात्रों के स्टडी सेंटरों में यौन-शोषण रोकथाम कमेटियों का गठन करने की मांगें शामिल थीं|उन्होने तुरंत देश भर सार्वजनिक कॉलेज खोले जाने की भी मांग उठाई जिससे वंचित छात्र भी औपचारिक उच्च शिक्षा तक पहुँच सकेंअपनी मांगें जल्द न माने जाने पर छात्रों ने अपना आन्दोलन और तीव्र करने और मानव संसाधन विकास मंत्री का आवास का घेराव करने का ऐलान किया है| 

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