मंडी हाउस से संसद मार्ग तक ‘पीपल्स मार्च’ का हुआ आयोजन! केवाईएस ने निभाई हिस्सेदारी!

भाजपा सरकार की जनता-विरोधी शिक्षा नीतियों के खिलाफ छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों ने हल्ला बोला!
केवाईएस ने सभी को केजी से पीजी तक अनिवार्य और समान शिक्षा देने की मांग उठाई!

नई दिल्ली, 19 फरवरी 2019: आज क्रांतिकारी युवा संगठन (केवाईएस) ने जाइंट फोरम फॉर मूवमेंट ऑन एडुकेशन (जे.एफ.एम.ई.) एवं अन्य प्रगतिशील संगठनों के साथ मिलकर केंद्र की भाजपा सरकार की नीतियों के खिलाफ मंडी हाउस से संसद मार्ग तक पीपल्स मार्च का आयोजन कियाइस मार्च में हजारों की संख्या में छात्रों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने हिस्सेदारी निभाई| मार्च से सरकार को उसकी सार्वजनिक शिक्षा क्षेत्र के निजीकरण और व्यवसायीकरण करने की नीति को चेतावनी दी गयी|
         ज्ञात हो कि बीजेपी सरकार के शासन में उच्च-शिक्षा पर लगातार हमला बढ़ा है और शिक्षा में निजीकरण को बढ़ावा देने की नीति अपनाई गयी है| यह हमला कभी छात्रों की फीस बढ़ाकर, तो कभी शिक्षा-बजट को घटाकर, तो कभी सीटों में कटौती करके किया जाता रहा है| सरकार द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में नई-नई नीतियां जैसे- शैक्षणिक संस्थानों को पूरा अनुदान न देना, कॉलेजों को ‘स्वायत्त’ बनाना, रैंकिंग के आधार पर बाँट कर अनुदान देना और हायर एडुकेशन फाईनानसिंग एजेंसी (हेफा) से क़र्ज़ को अनिवार्य करना जिसके तहत भारी फीस बढ़ोत्तरी होगीशिक्षकों को स्थायी नौकरियाँ न देकर उन्हें ठेके पर पढ़ाने को मजबूर करना, आदि लायीं जा रही हैं| सरकार की इन नीतियों से राजकीय और केन्द्रीय विश्वविद्यालयों के बीच मौजूदा गैर-बराबरी और अधिक बढ़ेगी और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में क्रमशः सीटों और नौकरियों की कटौती के कारण विश्वविद्यालयों तक पहुँच सिर्फ कुछ लोगों का विशेषाधिकार बनकर रह जाएगा| साथ हीकेंद्र और राज्य सरकारों द्वारा मास ओपन ऑनलाइन कोर्स (MOOC) और महानगर-स्थित विश्वविद्यालयों में दूरस्थ शिक्षा विभाग खोलने के माध्यम से शिक्षा के अनौपचारिक माध्यम को बढ़ावा दिया जा रहा हैइसका सीधा अर्थ यह है कि सरकार द्वारा अब नए कॉलेज या विश्वविद्यालय नहीं खोले जायेंगे और वंचित छात्रों को कॉरेस्पोंडेंस माध्यम से ही पढ़ाया जायेगाउनकी गैर-बराबरी को दूर करने की जगहसरकार उलटे शिक्षा से छात्रों को बहिष्कृत करने वाली नीतियाँ बना रही है|
जहाँ आज और भी ज्यादा संख्या में सरकारी कॉलेज और विश्वविद्यालय खोलने की ज़रूरत हैउसके विपरीत दोहरी-शिक्षा नीति और स्कूली शिक्षा के निजीकरण से पनपने वाली गैर-बराबरी को सरकार और भी ज्यादा बढ़ावा दे रही हैज्ञात हो कि रेगुलर कोर्सों में दाखिला पाने वाले बहुसंख्यक छात्र प्राइवेट स्कूलों से और सुसम्पन्न परिवारों से आते हैंजबकि समाज के निम्न तबके से आने वाले छात्र रेगुलर कोर्सों से बाहर हो जाते हैं और मजबूरी में कॉरेस्पोंडेंस या ओपन में एडमिशन ले लेते हैंदेश के विभिन्न कॉरेस्पोंडेंस विभागों में पढने वाले ज्यादातर छात्र एससी/एसटी/ओबीसी/अल्पसंख्यक समुदाय से आते हैं जो दोहरी शिक्षा की आग की जलन को- सरकारी स्कूल से लेकर दूरस्थ शिक्षा में घटिया स्तर की उच्च-शिक्षा तक – लगातार सहते हैंयह एक शैक्षणिक नस्लभेद है जो निरंतर पुनरुत्पादित होता रहता है12वीं की परीक्षा पास करने वाले छात्रों की कुल संख्या( जो पहले ही काफी कम और निराशाजनक है) का केवल छोटा हिस्सा ही उच्च शिक्षा में किसी तरह पहुँच पाता हैजिससे यह दिखता है कि उच्च शिक्षा की चाह रखनाविशेषकर रेगुलर माध्यम से उच्च शिक्षा की चाह रखना बहुसंख्यक भारतीय युवाओं के लिए दूरका स्वप्न है|
केवाईएस शिक्षा पर भाजपा सरकार द्वारा किए जा रहे हमले की कड़ी भर्त्सना करता है| साथ ही, केवाईएस यह भी मांग करता है कि सभी के लिए केजी से परास्नातक तक सभी को बराबर शिक्षा मिले, सरकारी स्कूल के छात्रों के लिए सरकारी शिक्षण संस्थानों में 10% रियायती अंक दिये जाएँ, और शिक्षा के निजीकरण पर रोक लगाई जाए| आने वाले दिनों मे क्रांतिकारी युवा संगठन सभी के लिए समान और अनिवार्य शिक्षा को लेकर अपना आंदोलन और भी तेज़ करेगा|

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