दिल्ली विश्वविद्यालय के महिला अध्ययन एवं विकास केंद्र के भेदभावपूर्ण नोटिस के खिलाफ मुक्त एवं दूरस्थ छात्रों का जुझारू प्रदर्शन! छात्रों ने जड़ा ताला!


नई दिल्ली, 11 मार्च 2019: क्रांतिकारी युवा संगठन (केवाईएस) कार्यकर्ताओं ने आज दिल्ली विश्वविद्यालय के महिला अध्ययन एवं विकास केंद्र (डब्ल्यू.एस.डी.सी) द्वारा जारी भेदभावपूर्ण नोटिस के विरोध में डीयू के एसओएल छात्रों के साथ मिलकर जुझारू प्रदर्शन किया| प्रदर्शन के दौरान अपमान-जनक नोटिस के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों मुख्य-द्वार पर ताला जड़ कर अपना विरोध दर्ज किया| इस दौरान प्रदर्शन कर रहे छात्रों को पुलिस ने जबर्दस्ती हिरासत में भी लिया| बाद में छात्रों के प्रतिनिधिमण्डल ने डाइरेक्टर-इन-चार्ज से मुलाक़ात की, जिससे प्रशासन नोटिस वापस लेने को मजबूर हुआ, तथा नई सूचना जारी की|
Old Notice
       ज्ञात हो कि एक नोटिस के माध्यम से डब्ल्यू.एस.डी.सी ने संस्थान का लोगो बनाने का कंपटीशन आयोजित किया था| इस नोटिस में कहा गया था कि “यह कंपटीशन दिल्ली स्थित विश्वविद्यालयों में पढ़ रहे सभी छात्रों के लिए खुला है, मुक्त एवं दूरस्थ छात्रों को छोड़कर”| इस नोटिस में जानबूझकर दूरस्थ छात्रों को कंपटीशन से बाहर किया जाना, वंचित और पिछड़ी पृष्ठभूमि के प्रति डब्ल्यू.एस.डी.सी का भेदभाव साफ प्रदर्शित करता है|औपचारिक शिक्षा से बाहर खिलाफ मुक्त एवं दूरस्थ संस्थानों में पढ़ रहे छात्रों को कंपटीशन से जानबूझकर बाहर कर दिया गया है क्योंकि अंततोगत्वा यह छात्र त्रस्त घरेलू कामगारों, ऑटो रिक्शा ड्राईवरों, छोटे दुकानदारों और देश के गरीब मजदूरों के बच्चे हैं – और अभिजात वर्ग से आने वाले छात्र नहीं हैं| ज्ञात हो कि दिल्ली में दूरस्थ पद्धति से शिक्षा ले रहे छात्रों में इग्नू, डीयू के एसओएल और जामिया के सीडीओएल में पढ़ रहे लाखों छात्र शामिल हैं| इसमें लगभग आधा हिस्सा छात्राओं का है जो वंचित घरों से आती हैं और जिनको अपने घरों के उत्पीड़न और आर्थिक समस्याओं से बाहर निकलने के लिए शिक्षा और अवसरों की और भी ज्यादा ज़रूरत है| यह तब और भी असहनीय हो जाता है जब इन वंचित छात्र-छात्राओं के प्रति खुद को ‘नारीवादी’ और ‘प्रगतिशील’ कहने वाले विश्वविद्यालय शिक्षक ही उनके खिलाफ भेदभाव करते हैं| डब्ल्यू.एस.डी.सी का बर्ताव यह भी दर्शाता है कि उसके लिए अभिजात वर्ग से आने वाले कुछ छात्रों को अवसर देना, बहुसंख्यक छात्रों के लिए बराबरी सुनिश्चित करने से ज्यादा महत्वपूर्ण है|


New Notice

       यह साफ तौर पर डब्ल्यू.एस.डी.सी का गरीब और निम्न-मध्यम वर्ग घरों से आने वाली छात्राओं के प्रति भेदभाव को दिखाता है| यह भेदभाव विश्वविद्यालय शिक्षकों और इन छात्रों के बीच मौजूद आर्थिक दूरी के कारण पनपता है| ऐसे संस्थागत भेदभाव का पर्दाफाश कर उसका विरोध करना चाहिए क्योंकि यह मौजूदा शैक्षणिक नस्लभेद का ही एक रूप है| दूरस्थ शिक्षा के छात्रों को कंपटीशन से बाहर निकालना, डब्ल्यू.एस.डी.सी के बड़े महिला अध्ययन केंद्र होने के दावों के खोखलेपन को ज़ाहिर करता है, खासकर तब जब रेगुलर शिक्षा पद्धति से बाहर बहुसंख्यक छात्रों के खिलाफ भेदभाव को उसके द्वारा और भी ज्यादा बढ़ावा दिया जा रहा हो| केवाईएस डब्ल्यू.एस.डी.सी, अपमान-जनक नोटिस के माध्यम से मौजूदा गैर-बराबर शिक्षा प्रणाली द्वारा पैदा होने वाले भेदभावों को बढ़ावा देने का विरोध करता है, तथा नया नोटिस जारी करने की सभी मुक्त एवं दूरस्थ संस्थानों में पढ़ रहे छात्रों को बधाई देता है| इसके साथ ही शिक्षा और समाज में भेदभाव के खिलाफ संघर्ष जारी रखने का संकल्प लेता है|
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